विश्व दिव्यांग दिवस

Brahmakumris

इंदौर 2 दिसम्बर 2018। हमें कभी यह नहीं समझना चाहिए कि ईश्वर ने किसी के साथ अन्याय किया है। भले किसी के अंदर शारीरिक रूप से किसी अंग की कमी हो या मानसिक रूप  से कमजोर हो। लेकिन उसके अंदर भी कुछ न कुछ विशेष योग्यता अवश्य होती है। अतः हमें शारीरिक व मानसिक कमी को न देख अंतर्निहित क्षमता को पहचान कर उसे अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ना है।

उक्त विचार ओमप्रकाश भाईजी सभागृह ज्ञान शिखर ओम शांति भवन में विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में तवलीन फाउंडेशन के संस्थापक डाॅ. गुरमीत सिंह नारंग ने विशेष अतिथि के रूप में रखें। आपने कहां कि विकलांग वह नहीं है जिनके हाथ पैर आँख नहीं है लेकिन विकलांग वह है जो सम्पूर्ण स्वस्थ होते हुए भी जिनके कदम श्रेष्ठ कर्म की ओर अग्रसर नहीं होते हैं।

वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अनिता ने कहां कि उक्त कार्यक्रम यू एन के द्वारा मिली इस वर्ष की थीम दिव्यांग – समानता, संरक्षण और सशक्तिकरण के अंतर्गत पूरे ब्रह्माकुमरी संस्थान में आयोजित किया जा रहा है। आगे आपने कहां कि शारीरिक अक्षमता से ज्यादा मानसिक अक्षमता हमें आगे बढ़ने से रोकती है। दुनिया में कई ऐसे उदाहरण है जिन्होंने शारीरिकअक्षमता के बावजुद दुनिया को बहुत कुछ दिया है। क्योंकि यह शरीर तो साधन मात्र है किंतु इसको चलाने वाली चैतन्य शक्ति आत्मा अगर शक्तिशाली है तो अक्षम शरीर के द्वारा भी ऐसे अद्भूत कार्य कर सकती है जिसे दुनिया चमत्कार कहती है। क्योंकि श्रेष्ठ कार्य करने के लिए स्वस्थ तन नहीं अपितु सुंदर सकारात्मक मन की आवश्यकता है जो परमात्मा ने सभी को एक समान दिया है।

अपने विचार रखते हुए आनंद सर्विस सोसायटी मुक बधिर संगठन के संस्थापक ज्ञानेन्द्र पुरोहित ने कहां कि मुख की भाषा से ज्यादा ताकत कर्म में है और यह दिव्यांग बच्चे कहने के बजाय करके दिखाते हैं। इन्हें भी समाज में आम आदमी की तरह जीने का अधिकार है। इनके प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना हर इंसान का कर्तव्य होना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिल्पा देसाई ने किया एवं मानसिक सशक्तिकरण के लिए साईन लेग्वेज में राजयोग मेडीटेशन की विधि बताई गई तथा आनंद सर्विस सोसायटी मुक बधिर संगठन के बच्चों द्वारा  मोनोएक्टिंग कर मोबाईल का अधिक उपयोग न करना, शराब पीकर वाहन न चलाना आदि कई संदेश दियें।