World Environment Day

इंदौर 5 जून 2019। मनुष्य अपने आवास के लिये शांत शुद्ध प्राकृतिक वातावरण वाले स्थलों को प्राथमिकता देता है जितना प्रकृति के करीब जाते है तन और मन को सुकुन मिलता है क्यांेकि मानव और प्रकृति का आदिकाल से अटूट रिश्ता रहा है। प्रकृति हमें जीवन देती है सुख समृद्धि देती है इसलिये प्रकृति की रक्षा करना हर मानव का कर्तव्य होना चाहिये। उक्त विचार ओमप्रकाश भाईजी सभागृह ज्ञानशिखर ओमशान्ति भवन में आज 5 जून विश्व पर्यावरण महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में ” जीवन में आध्यात्म और प्रकृति का महत्व ” विषय पर मुख्य अतिथि के रुप में मुख्य वन संरक्षक एम कालीदुराई ने कहे। आपने नये वृक्ष लगाने और उसकी देखभाल करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर इंदौर जोन की मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि वर्तमान समय पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव और मनुष्य की बढती इच्छाओं ने प्रकृति का संतुलन बिगाड दिया है प्राकृतिक असंतुलन के कारण ही प्राकृतिक प्रकोप, भूकम्प, बाढ, सुनामी, बर्फीले तूफान, पृथ्वी का तापमान बढ रहा है इसी प्रकार कृषि में कीटनाशक दवाईयों और विषैले रसायनिक खाद से खाद्य सामग्री एवं पर्यावरण दोनों ही प्रदूषित होता जा रहा है नई नई लाइलाज बीमारियां बढ रही है जो कि चिंता का विषय है। अतः मन की इच्छाओं को कम कर शुद्ध सकारात्मक विचारों से स्वयं को एवं प्रकुति को शुद्ध वायब्रेशन देंगे तो प्रकृति हमारी सहयोगी बन जायेगी। आपने उदाहरण सहित बताया कि कैसे प्रकृति हमारे एक एक संकल्पों को ग्रहण करती है इसके लिये आपने आध्यात्मिक ज्ञान एवं राजयोग मेडिटेशन की विधि बताकर प्रेक्टिकल अनुभूति कराई।
पिथमपुर औधोगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी ने कहा कि वर्तमान समय जिस प्रकार से प्रकृति का दोहन हो रहा है इससे भविष्य पीढी को भी खतरा हो सकता है आपने कहा कि प्रकृति सबको समान रुप से दाता बन कर देती है इसलिये प्राकृतिक संसाधन भी सबके लिये समान होना चाहिए ।
कृषि विभाग के सहायक संचालक गोपेश पाठक ने अनाज कटाई के बाद अवशेषों को जलाने के प्रति चिंता जताते हुए कहा कि इससे जन स्वास्थ और पर्यावरण और मृदा सभी को नुकसान होता है हमारी पृथ्वी के स्वास्थ्य के लिये बहुत नुकसान कारी है अतः इसके प्रति जन जागरुकता विश्व स्तर पर होनी चाहिए । कृषि महाविद्यालय के पूर्व डीन डाॅ. बीके स्र्वणकार ने कहा कि प्रकृति संरक्षण की शुरुआत अपने घर से करें जिस प्रकार हम बच्चों व परिवार की देखभाल करते है उसी प्रकार प्रकृति पेड़ पौधों की संभाल , जल की बचत जागरुक होकर करें। इसके लिए जन भागीदारी आवश्यक है।